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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

संकल्पकलनोन्मुक्ते स्वसंविन्मात्रकोटरे । यस्तिष्ठत्यात्मनि स्वैरमात्मारामो महेश्वरः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

समस्त संकल्प-विकल्पों से निर्मुक्त अपनी संविन्मात्ररूप अन्तरात्मा में, स्वेच्छा से जो स्थित रहता है, वह आत्मारामी महान्‌ ईश्वर ही है