Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
न तं भिन्दन्ति शस्त्राणि न दहन्ति हुताशनाः ।
न क्लेदयन्ति वारीणि शोषयन्ति न मारुताः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसे पुरुष को शत्र छेदते नहीं, अग्नि जलाती
नहीं, जल भिगाते नहीं ओर पवन सुखाता नहीं