Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
तस्मिंस्तूष्णीं स्थिते किं स्यादिति सभ्ये महाजने ।
पतिते संशयाम्भोधौ रामः पुनरुवाच ह ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी तो मौन धारणकर स्थित रहे ओर इधर सभ्य महाजन अब क्या होगा, इस
संशय-सागर में पड़ गये, यह देखकर श्रीरामभद्र फिर कहने लगे