Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
अविचारात्ससंकल्पं मौनमाहुः परं पदम् ।
तदेव तव तज्ज्ञस्य दत्तः सुन्दर उत्तरः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जो परमपद है, वह तत्त्वज्ञान के पूर्व अज्ञान से उपदेशवाणी के योग्य है, वह
कल्पनाकर ससंकल्प बनता है यानी वाणी के व्यवहाररूप संकल्प का विषय हो जाता है और
विचार से ज्ञात हो जाने पर मौन यानी वाणी का अविषय हो जाता है, यों विद्वानों का निश्चय है,
इसलिए तत्त्वज्ञानी हुए आपको अब यह मौन ही मैंने सुन्दर उत्तर दिया