Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एवं स्थिते राघव हे यथाभूतमिदं श्रृणु ।
कस्त्वं कोऽहं जगद्वा किमिति तत्त्वविदां वर ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे राघव, हे तत्त्वज्ञ मे श्रेष्ठ, जब आप भागत्यागलक्षणा से कुछ
कहलाने के लिए उद्यत हैं, तब आप यथार्थरूप से स्थित इस विषय को सुनिये किं आप कौन है,
मैं कौन हूँ ओर यह जगत् क्या है