Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
स्वच्छं चिदाकाशमहं भवानाकाशमेव च ।
जगच्चाकाशमखिलं सर्वमाकाशमात्रकम् ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
मेँ स्वच्छ चिदाकाशरूप हूँ, आप चिदाकाशरूप हैं ओर सम्पूर्णं यह
जगत् भी आकाशरूप ही है, अधिक क्या कहें, समस्त केवल आकाश ही है