Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
भूतानि मृत्युकार्येषु संग्रामादिषु निर्दह ।
दावानलस्तृणानीव वासनाक्रान्तमूढवत् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनाओं से आक्रान्त मूढ पुरुषों के सदृश अधार्मिक प्राणियों को मृत्यु के हेतु संग्राम आदि में
डालकर जैसे तृण को अग्नि जला डालती है वैसे जला दीजिए