Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
क्रमागतेष्वखिन्नोऽर्थं बकवच्चिन्तयार्जय ।
अर्थोपार्जनकार्येषु वासनाक्रान्तमूढवत् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रारब्ध कर्मो के अनुसार प्राप्त
हुए धर्मअविरोधी धन आदि के उपार्जन आदि कार्यों का बगुले के सदृश ऐसे अखिन्न होकर चिन्तन
और अर्जन कीजिए, जैसे वासनायुक्त कर्मठ पुरुष