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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 74

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 74

संस्कृत श्लोक

सर्वं शून्यं निरालम्बं ममताप्रत्ययोऽप्ययम् । द्विचन्द्रस्वप्नपुरवद्यस्यासौ सोऽपि नास्ति नः ॥ ७४ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस अहंकार में हम लोगों को यह ममताबुद्धि होती है उसका भी कहीं अस्तित्व नहीं है। इसलिए समस्त शून्यरूप अवलम्बनरहित एवं दो चन्द्रमा या स्वप्ननगर के सदृश मिथ्या है