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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 3, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

समूलमलमुद्धृत्य कर्मबीजकलामिति । नित्यमेकसमाधानास्तज्ज्ञास्तिष्ठन्त्यतः सुखम् ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्वोक्त रीति से चूँकि ज्ञानी-पुरुष कर्मबीजरूपी अंशो का समूल भलीभोति उच्छेदकर निरन्तर एकमात्र निर्विकल्प समाधि में स्थित रहते हैं, इसलिए वे सुख का उपयोग करते हैं