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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 31, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

असतामेव सद्भावमिव येषामुपेयुषाम् । न वयं निर्णयं विद्मो वन्ध्यापुत्रगिरामिव ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

यही कारण है कि जीव और जयद्वपों के विषय में कोर्ड निर्णय न हो सकने से अनिर्ववनीयता कही गई हैं, यह कहते हैं / जो लोग असत्पदार्थों का ही सद्भाव-सा मानते हैं, वन्ध्या-पुत्र की वाणी की तरह हम लोग उनका कोई निर्णय नहीं जानते। कहने का तात्पर्य यह है कि जीव और जगद्रूप अनिर्वचनीय ही है