Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 31, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अचला इव निर्वाता दीपा इव समत्विषः ।
साचारा वा निराचारास्तिष्ठन्ति स्वस्थमेव ते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
आचारशून्य होते हुए भी आचारयुक्त स्वस्थ ही बने रहते हैं