Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 31, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
आपूर्णैकार्णवप्रख्या काप्यन्तः पूर्णतोदिता ।
अन्तःशीतलता ज्ञप्तिर्ज्ञस्यापूर्वैव लक्ष्यते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञानी पुरुष के हृदय
के भीतर उदित हुई परिपूर्ण समुद्र के समान कोई अनिर्वचनीय ही पूर्णता रहती है तथा
ज्ञानरूपा भीतरी शीतलता भी कोई अपूर्वं ही लक्षित होती है