Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 32, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कोऽहं कथमिदं दृश्यं को जीवः किं च जीवनम् ।
इति तत्त्वज्ञसंयोगाद्यावज्जीवं विचारयेत् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, मैं कौन हूँ यह प्रपंच किस तरह आया, जीव कौन है, प्राणधारणरूप जीवन का क्या
स्वरूप है इन सबका तत्त्वज्ञ के संग से जीवनपर्यन्त विचार करना चाहिए