Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 32, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
अतः प्रत्येकमेकान्ते प्राज्ञः सेवेत पण्डितम् ।
एकीकृत्य तदुक्तांस्तानर्थान्बुद्ध्या विचारयेत् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए प्रत्येक पण्डित के पास जाकर एकान्त मेँ बुद्धिमान् पुरुष को
उसकी सेवा करनी चाहिए, प्रश्न करना चाहिए ओर फिर उनके द्वारा कथित अर्थो को मिलाकर
अपनी बुद्धि से विचार करना चाहिए