Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 32, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
विपश्चित्संगमैर्बुद्धिं नीत्वा परमतीक्ष्णताम् ।
अज्ञानलतिका सैका कणशः क्रियतामलम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इक्रीसे तत्वज्ञान का उद्य और उससे अज्ञान का उच्छेद हो जाता है यह कहते हैं /
तत्त्ज्ञानियों के सम्बन्ध से बुद्धि को अत्यन्त तीक्ष्ण बनाकर केवल उस अज्ञानरूपी लता को
खूब छोटे-छोटे कणों में बना दीजिए