Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
महाचिदनिलस्पन्दा एता एवानुभूतयः ।
एतास्ता ब्रह्मगगनशून्यता इति बुध्यताम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
ये सभी अनुभव महाचितिरूपी वायु के स्पन्दन ही हैं,
इसलिए वे सब अनुभव ब्रह्मरूप गगन की शून्यरूपता का ही सेवन करते हैं, यह आप जानिये