Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
भ्रान्तिस्तु तावत्तत्त्वार्थविचारो यावदस्फुटः ।
विचारे तु स्फुटे भ्रान्तिर्ब्रह्मतामेव गच्छति ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
कब तक वह श्रान्त रहती है, इस पर कहते हैं /
जब तक तत्त्वार्थ का विचार विस्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक ही यह भ्रान्ति रहती है और जब
विचार स्पष्ट हो जाता है, तब तो यह सारी भ्रान्ति ब्रह्मरूपता को ही प्राप्त कर लेती है