Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अहंभावमथादेहं किंचिच्छ्रयसि नश्यसि ।
जगदादिरुचिस्तस्मिंस्त्यक्ते शाम्यसि सिध्यसि ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा के विस्मरण से संसारताप से अवश्य तपेगे ओर यदि अहम्भाव का त्याग कर देंगे, तो
समस्त दुःखों से छुटकारा पा जायेंगे तथा नित्य निरतिशयानंद स्वभाव से सिद्ध हो जायेंगे