Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
भाण्डलक्षाणि धत्तेऽन्तश्चिद्रूपकनकेष्टिका ।
यदेव सा चेतयते जगदादीव वेत्ति तत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह चितिरूपी कुलाली जब
स्मरण करती है, तभी जगत् को देखने लगती है ओर अपने भीतर लाखों की संख्या में बड़े-बड़े
बर्तन धारण करने लग जाती है