Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यस्येक्षितस्य नो सत्ता नाधारो न च कारणम् ।
सोऽहमित्येव यो यक्षो न जाने कुत उत्थितः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त कल्यनाओ के मूलभूत एक अहंकार की ही परीक्षा कर लेने से मिथ्यात्व का निश्चय हो
जाने पर समस्त जगत् का निथ्यात्व प्रिद्ध हो जाता हैं, इस आशय से कहते हैं
ठीक-ठीक देखने पर जिसकी सत्ता नहीं मिलती, जिसका आधारभूत कोई नहीं और
जिसका कोई कारण नहीं है, वह "अहम्" रूप यक्ष कहाँ से उत्पन्न हुआ, यह जाना नहीं जा
सकता