Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
यस्याहमिति यक्षस्य सत्तैवास्ति न सत्यतः ।
अहो नु चित्रं तेनेमे भवन्तो विवशीकृताः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस अहंकाररूप यक्ष की वस्तुतः सत्ता ही नहीं है, उसीने इन आप सब लोगों
को पराधीन बना डाला है, यह बड़ा भारी आश्चर्य है