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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अनाकृतावसंस्थाने स्वच्छे यदनुभूयते । तत्तदेवात उदितं किंनामाहं जगन्ति किम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसका कोई आकार नहीं है, जो अवयवों से रहित है ओर स्वच्छ है, उसमें जो कुछ दिखाई देता है, वह तद्रूप ही होता है, इसलिए यह उत्पन्न हुआ अहंकार क्या है ओर ये जगत्‌ ही क्या है ?