Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
न भवन्तो न च वयं न जगन्ति न खादयः ।
सन्ति शान्तमशेषेण ब्रह्मेदं निर्भरं स्थितम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
न आप हैं, न हम हैं, न जगत् हे, न आकाश
आदि हैं, किन्तु अशेषरूप से परिपूर्ण सर्वोपद्रववर्जित अपरोक्ष ब्रह्म ही स्थित है