Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
द्रष्टृदृश्यदशाभावाज्जाग्रत्येव सुषुप्तिवत् ।
शरदाकाशकोशाभमसत्तोपममास्यताम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भद्र,
द्रष्टा, दृश्य की दशा न रहने से जाग्रदवस्था में ही सुषुप्ति के सदृश तथा शरदाकाश के सदृश
शून्य की तरह आप स्थित रहिये