Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
अस्मिन्व्योमात्मके रङ्गे भुवनाभिनयभ्रमैः ।
मृत्यत्यविरतारम्भं वारैर्नियतिनर्तकी ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी
चिदाकाशरूपी रंगभूमि में भुवन की रचनारूप अभिनय के भ्रमों से युक्त निरन्तर कार्यारम्भ कर
रही नियतिरूपी नर्तकी कल्पभेदरूप वासनाओं तथा नित्य महोत्सव के दिनों से नृत्य कर रही
है