Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सर्वं शान्तं शिवं शुद्धं त्वमहंतादिविभ्रमम् ।
न किंचिदपि पश्यामि व्योमजं काननं यथा ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
त्वत्ता ओर अहन्तादि सब विभ्रम शान्त, शिव तथा शुद्ध
ब्रह्मरूप ही हैं अतः आकाश मेँ उत्पन्न जंगल की तरह उन्हें मैं कुछ भी नहीं देखता