Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
संविदाकाशशून्यत्वं यत्तद्विद्धि वचो मम ।
इदं त्वत्संविदाकाशे स्वयमात्मनि तिष्ठति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
श्रीरामजी, इस तरह जो मेरा उपदेश वचन है उसे भी आप संविदाकाशरूप शून्य ही समझिये,
क्योकि यह मेरा वचन आपकी संविदाकाशरूप आत्मा में ही स्वयं स्थित रहता है, जडस्वरूप में
नहीं