Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
इच्छामात्रं विदुश्चित्तं तच्छान्तिर्मोक्ष उच्यते ।
एतावन्त्येव शास्त्राणि तपांसि नियमा यमाः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इच्छामात्र को
दुःखदायक चित्त कहते हैं और इच्छा की शान्ति ही मोक्ष कहलाता है । एकमात्र इसी में सकल
शास्त्र, तप, नियम और यम पर्यवसित हैं