Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
इच्छोदयो यथा दुःखमिच्छाशान्तिर्यथा सुखम् ।
तथा न नरके नापि ब्रह्मलोकेऽनुभूयते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इच्छा के
उदय से जैसा दुःख होता है वैसा दुःख नरक में भी प्राणी को नहीं होता और इच्छा की शान्ति से
जैसा सुख मिलता है वैसा ब्रह्मलोक में भी अनुभूत नहीं होता । (7))