Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
निरिच्छत्वं समाधानमाहुरागमभूषणाः ।
यथा शाम्येन्मनोऽनिच्छं नोपदेशशतैस्तथा ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः भोगेच्छा का त्याग ही मन की शान्ति में मुख्य हेतु है, यह कहते हैं ।
भोगों की इच्छा के त्याग को ही आगमालंकारों ने (वेदान्तवेत्ताओं ने) समाधि कही है। इच्छा
के त्याग से जैसा मन शान्त होता है वैसा सैकड़ों उपदेशों से भी शान्त नहीं होता