Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
यथा यथेच्छा तनुतां याति जन्तोर्विवेकतः ।
तथा तथोपशाम्यन्ति दुःखचिन्ताविषूचिकाः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे-जैसे विवेकज्ञान
द्वारा जन्तु की इच्छा सूक्ष्म होती-जाती है, वैसे-वैसे दुःखों की चिन्तारूप विषूचिका (हैजा) भी
शान्त होती जाती है