Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
यस्त्विच्छातानवे यत्नं न करोति नराधमः ।
सोऽन्धकूपे स्वमात्मानं दिनानुदिनमुज्झति ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
जो नराधम, अपनी भोगों की इच्छा को सूक्ष्म
बनाने में यत्न नहीं करता, वह प्रतिदिन मानों अपनी आत्मा को अन्धकूप में फेंकता है