Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
शास्त्रोपदेशगुरवः प्रेक्ष्यन्ते किमनर्थकम् ।
किमिच्छाननुसंधानसमाधिर्नाधिगम्यते ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
इच्छा की शान्ति में यत्न न होने पर शास्त्रादि के उपदेश भी सव व्यर्थ ही है, यह कहते है/
यदि आपकी इच्छा की शान्ति नहीं हुई है, तो फिर शास्त्रों के उपदेश और गुरुओं की
प्रतीक्षा निरर्थक क्यों कर रहे हैं ? इच्छा के अभावरूप चित्त को शान्त करने के उपाय का
आश्रय आप लोग क्यों नहीं कर रहे हैं