Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
यस्येच्छाननुसंधानमात्रे दुःसाध्यता मतेः ।
गुरूपदेशशास्त्रादि तस्य नूनं निरर्थकम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसको अपने विवेक से सिर्फ इच्छा का
अनुसन्धान न करना दुःसाध्य हो रहा है, उसके लिए गुरुओं के उपदेश तथा शास्त्र आदि सब
निरर्थक है, इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है