Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
इच्छाविषविकारिण्यामन्त एव नृणामलम् ।
दुःखप्रसरकारिण्या हरिण्या जन्म जङ्गले ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे व्याघ्र आदि से भरे जंगल में हरिणी की
मृत्यु निश्चित है वैसे ही नानाविध दुःखों का विस्तार करनेवाली इच्छारूपी विषके विकार से
युक्त इस संसार में मनुष्यों की मृत्यु बिलकुल निश्चित है