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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

न बालीक्रियते त्वीषदात्मज्ञानाय चेदसौ । इच्छोपशान्तिः क्रियतां तयालं तदवाप्यते ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि इच्छा से यह मनुष्य लड़कों-जैसा चंचल न बना दिया जाय, तो उसे आत्मज्ञान के लिए बहुत थोड़ा ही प्रयत्न करना पड़ता है । इसलिए आप लोग भलीभाँति इच्छा की उपशान्ति ही कर डालें, उसी से वह परमपद ज्ञान प्राप्त होता है