Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
निरिच्छतैव निर्वाणं सेच्छतैव हि बन्धनम् ।
यथाशक्ति जयेदिच्छां किमेतावति दुष्करम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
इच्छा का न होना ही निर्वाण है और इच्छासहित रहना ही मनुष्य के
लिए बन्धन है, इसलिए यथाशक्ति इच्छा के ऊपर आप लोग विजय प्राप्त करें | सिर्फ इतना
करने में कौन-सी कठिनाई है ?