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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

जरामरणजन्मादि करञ्जखदिरावलेः । बीजमिच्छा सदैवान्तर्दह्यतां शमवह्निना ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

जरा, मरण, जन्मादिरूप करंज और खैर की पंक्तियों का बीज इच्छा ही है । उसको अपने भीतर अभ्यस्त शमरूपी अग्नि से आप लोग जला डालें