Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
यतो यतो निरिच्छत्वं मुक्ततैव ततस्ततः ।
यावद्गति यथाप्राणं हन्यादिच्छां समुत्थिताम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जहाँ-जहाँ इच्छा का अभाव है वहाँ-वहाँ मुक्ति है ही जब तक विवेक वैराग्य
आदि उपायों की प्राप्ति नहीं हो जाती, तब तक अपने में जितना धैर्य और बल हो, उसके
अनुसार उठी हुई इच्छा का नाश करते चलें