Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
यतो यतश्च सेच्छत्वं बन्धपाशास्ततस्ततः ।
पुण्यपापमया दुःखराशयो विततार्तयः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जहाँ-जहाँ इच्छा है वहाँ-वहाँ पुण्य-पापमय
दुःखों की राशि तथा निरन्तर फैल रहे करुण क्रन्दन से युक्त बन्धन के पाश हैं ही