Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
कार्यकारणभावादि ब्रह्मैव सकलं यदा ।
तदा तु ब्रह्मता ह्यस्मिन्संविन्मात्रात्मके तते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जब कार्यकारणभावादि सब ब्रह्म ही है,
तभी तो देहादिपरिच्छिन्न पदार्थों के बाध से विस्तार को प्राप्त चिन्मात्रात्मक प्रत्यगात्मा में ब्रह्मता
सिद्ध होती है