Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तदा ब्रह्मणि सर्गाणां कारणार्था विलज्जता ।
न दुःखमस्ति न सुखं शान्तं शिवमयं जगत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
न तो दुःख है और न सुख है, किन्तु शान्त शिवमय यह
जगत् है। जब चिन्मात्रता से भिन्न कुछ है ही नहीं, तब भला इच्छा का उदय कहाँ से ?