Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
नास्ति चिन्मात्रतान्यत्वमत इच्छोदयः कुतः ।
मृद्देहयोधसेनायां न मृन्मात्रेतरद्यथा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
मिट्टी की देहवाली योद्धाओं की सेना में एकमात्र मिट्टी से अन्य कुछ नहीं है वैसे ही सदात्मक जगत्
और अहन्तादिरूप दृश्य में सत् ब्रह्म से इतर ओर कुछ नहीं है