Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
यथा संबुद्धवान्राम तत्सत्यं किं त्विदं श्रृणु ।
यदा यदा ज्ञतोदेति शाम्यतीच्छा तदा तदा ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब-जब आत्मतत्त्वज्ञान उदित होता है
तब-तब सांसारिक विषयोपभोग की इच्छा शान्त हो जाती है