Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
वस्तुस्वभावादुदयत्यादित्ये यामिनी यथा ।
शाम्यत्येव न तूदेति ज्ञप्ताविच्छादि तत्तथा ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
क्योकि यही वस्तु का स्वभाव
है। सूर्य के उदित होने पर जैसे रात बिलकुल शान्त हो जाती है, उदित नहीं होती, वैसे ही ज्ञान
का उदय होने पर इच्छा आदि सब शान्त हो जाते है