Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
यथा यथोदयो ज्ञप्तेर्द्वैतशान्तिस्तथा तथा ।
वासनाविलयश्चैव कथमिच्छोदयो भवेत् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे-जैसे ज्ञान का उदय होता है,
वैसे-वैसे द्वैत की शान्ति ओर वासना का विलय होता है, तब भला इच्छा का उदय कैसे हो ?