Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
न दुःखमस्ति न सुखं शान्तं शिवमजं जगत् ।
इति योऽन्तः शिलेवास्ते तं प्रबुद्धं विदुर्बुधाः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
न दुःख है और न सुख ही है, किन्तु यह सारा जगत् अज, आनन्दस्वरूप, शान्त परब्रह्म
ही है, इस तरह के निश्चय से जो अपने भीतर पत्थर के सदुश अटल रूप से रहता है उसी को
पण्डित लोग तत्त्वज्ञ कहते हैं