Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
असंवेदनसंवित्खे ततेऽविश्वमिति स्थिते ।
सौम्ये समसमे शान्ते शिवेऽहंताभ्रमः क्षयी ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त रीति से जगत् नहीं है, इस भावना से जब व्यापक विषयशून्य संविद्-रूप आकाश
स्थित हो जाता है, तब सबमें एकरूप से रहनेवाला सौम्य शान्त आनन्दमय आत्मा में अहन्ताभ्रम
नष्ट हो जाता है