Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
यथा शून्यत्वनभसोर्यथा स्पन्दनभस्वतोः ।
भेदो नास्ति तथा सर्गब्रह्मणोरेकरूपयोः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
यही कारण है कि जगत् ओर बल्यस्तत्ता के एकरूप होने से इन दोनों में कोड भेद नहीं हैं,
यह कहते हैं /
जैसे आकाश और शून्यता में एवं जैसे स्पन्दन और वायु में कोई भेद नहीं है वैसे ही एकरूप
ब्रह्म और सृष्टि में भी कोई भेद नहीं है